श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.45

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

फलभक्षेण गर्भः स्याद्गर्भेणोदरवृद्धिता।

स्वल्पभक्षं ततोऽशक्तिर्गृहकार्यं कथं भवेत्॥ ४५

phalabhakṣeṇa garbhaḥ syādgarbheṇodaravṛddhitā|

svalpabhakṣaṃ tato'śaktirgṛhakāryaṃ kathaṃ bhavet|| 45

अर्थ

फल खानेसे गर्भ रहेगा और गर्भसे पेट बढ़ जायगा। फिर कुछ खाया-पीया जायगा नहीं, इससे मेरी शक्ति क्षीण हो जायगी; तब बता, घरका धंधा कैसे होगा?॥ ४५॥

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