॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.4.45
फलभक्षेण गर्भः स्याद्गर्भेणोदरवृद्धिता।
स्वल्पभक्षं ततोऽशक्तिर्गृहकार्यं कथं भवेत्॥ ४५
phalabhakṣeṇa garbhaḥ syādgarbheṇodaravṛddhitā|
svalpabhakṣaṃ tato'śaktirgṛhakāryaṃ kathaṃ bhavet|| 45
अर्थ
फल खानेसे गर्भ रहेगा और गर्भसे पेट बढ़ जायगा। फिर कुछ खाया-पीया जायगा नहीं, इससे मेरी शक्ति क्षीण हो जायगी; तब बता, घरका धंधा कैसे होगा?॥ ४५॥