श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.46

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

दैवाद्धाटी व्रजेद्ग्रामे पलायेद्गर्भिणी कथम्।

शुकवन्‍निवसेद्गर्भस्तं कुक्षेः कथमुत्सृजेत्॥ ४६

daivāddhāṭī vrajedgrāme palāyedgarbhiṇī katham|

śukavannivasedgarbhastaṃ kukṣeḥ kathamutsṛjet|| 46

अर्थ

और—दैववश—यदि कहीं गाँवमें डाकुओंका आक्रमण हो गया तो गर्भिणी स्त्री कैसे भागेगी। यदि शुकदेवजीकी तरह यह गर्भ भी पेटमें ही रह गया तो इसे बाहर कैसे निकाला जायगा॥ ४६॥

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