सन्तानके अभावके दुःखने उसके शरीरको बहुत सुखा दिया था, इसलिये थक जानेके कारण जल पीकर वह वहीं बैठ गया। दो घड़ी बीतनेपर वहाँ एक संन्यासी महात्मा आये॥ २४॥
पीत्वा जलं निषण्णस्तु प्रजादुःखेन कर्शितः।
मुहूर्तादपि तत्रैव संन्यासी कश्चिदागतः॥ २४
सन्तानके अभावके दुःखने उसके शरीरको बहुत सुखा दिया था, इसलिये थक जानेके कारण जल पीकर वह वहीं बैठ गया। दो घड़ी बीतनेपर वहाँ एक संन्यासी महात्मा आये॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 56) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/24/