एक दिन वह ब्राह्मणदेवता बहुत दुःखी होकर घरसे निकलकर वनको चल दिया। दोपहरके समय उसे प्यास लगी, इसलिये वह एक तालाबपर आया॥ २३॥
एकदा स द्विजो दुःखाद् गृहं त्यक्त्वा वनं गतः।
मध्याह्ने तृषितो जातस्तडागं समुपेयिवान्॥ २३
एक दिन वह ब्राह्मणदेवता बहुत दुःखी होकर घरसे निकलकर वनको चल दिया। दोपहरके समय उसे प्यास लगी, इसलिये वह एक तालाबपर आया॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 56) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/23/