श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.25

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

दृष्ट्वा पीतजलं तं तु विप्रो यातस्तदन्तिकम्।

नत्वा च पादयोस्तस्य निःश्‍वसन् संस्थितः पुरः॥ २५

dṛṣṭvā pītajalaṃ taṃ tu vipro yātastadantikam|

natvā ca pādayostasya niḥśvasan saṃsthitaḥ puraḥ|| 25

अर्थ

जब ब्राह्मणदेवताने देखा कि वे जल पी चुके हैं, तब वह उनके पास गया और चरणोंमें नमस्कार करनेके बाद सामने खड़े होकर लंबी-लंबी साँसें लेने लगा॥ २५॥

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