kvāhaṃ tu tiṣṭhāmyadhunā bruvantu brāhmā idaṃ tāṃ giramūcire te|| 70
अर्थ
भक्ति बोलीं—मैं कलियुगमें नष्टप्राय हो गयी थी, आपने कथामृतसे सींचकर मुझे फिर पुष्ट कर दिया। अब आप यह बताइये कि मैं कहाँ रहूँ? यह सुनकर सनकादिने उससे कहा—॥ ७०॥✎ 1568
भवद्भिरद्यैव कृतास्मि पुष्टा कलिप्रणष्टापि कथारसेन।
क्वाहं तु तिष्ठाम्यधुना ब्रुवन्तु ब्राह्मा इदं तां गिरमूचिरे ते॥ ७०
भक्ति बोलीं—मैं कलियुगमें नष्टप्राय हो गयी थी, आपने कथामृतसे सींचकर मुझे फिर पुष्ट कर दिया। अब आप यह बताइये कि मैं कहाँ रहूँ? यह सुनकर सनकादिने उससे कहा—॥ ७०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.70 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 53) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/70/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)