श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.70

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

भक्तिरुवाच

भवद्भिरद्यैव कृतास्मि पुष्टा कलिप्रणष्टापि कथारसेन।

क्‍वाहं तु तिष्ठाम्यधुना ब्रुवन्तु ब्राह्मा इदं तां गिरमूचिरे ते॥ ७०

bhavadbhiradyaiva kṛtāsmi puṣṭā kalipraṇaṣṭāpi kathārasena|

kvāhaṃ tu tiṣṭhāmyadhunā bruvantu brāhmā idaṃ tāṃ giramūcire te|| 70

अर्थ

भक्ति बोलीं—मैं कलियुगमें नष्टप्राय हो गयी थी, आपने कथामृतसे सींचकर मुझे फिर पुष्ट कर दिया। अब आप यह बताइये कि मैं कहाँ रहूँ? यह सुनकर सनकादिने उससे कहा—॥ ७०॥✎ 1568

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1568 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: करने-वाली → करनेवाली

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