॥ श्रीहरिः ॥
ऊचुः कुमारा वचनं तदानीं कथार्थतो निष्पतिताधुनेयम्।
एवं गिरः सा ससुता निशम्य सनत्कुमारं निजगाद नम्रा॥ ६९
ūcuḥ kumārā vacanaṃ tadānīṃ kathārthato niṣpatitādhuneyam|
evaṃ giraḥ sā sasutā niśamya sanatkumāraṃ nijagāda namrā|| 69
अर्थ
तब सनकादिने कहा—‘ये भक्तिदेवी अभी-अभी कथाके अर्थसे निकली हैं।’ उनके ये वचन सुनकर भक्तिने अपने पुत्रोंसमेत अत्यन्त विनम्र होकर सनत्कुमारजीसे कहा॥ ६९॥
ऊचुः कुमारा वचनं तदानीं कथार्थतो निष्पतिताधुनेयम्।
एवं गिरः सा ससुता निशम्य सनत्कुमारं निजगाद नम्रा॥ ६९
तब सनकादिने कहा—‘ये भक्तिदेवी अभी-अभी कथाके अर्थसे निकली हैं।’ उनके ये वचन सुनकर भक्तिने अपने पुत्रोंसमेत अत्यन्त विनम्र होकर सनत्कुमारजीसे कहा॥ ६९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.69 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 53) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/69/