॥ श्रीहरिः ॥
मनसश्चाजयाद्रोगात्पुंसां चैवायुषः क्षयात्।
कलेर्दोषबहुत्वाच्च सप्ताहश्रवणं मतम्॥ ४९
manasaścājayādrogātpuṃsāṃ caivāyuṣaḥ kṣayāt|
kalerdoṣabahutvācca saptāhaśravaṇaṃ matam|| 49
अर्थ
मनके असंयम, रोगोंकी बहुलता और आयुकी अल्पताके कारण तथा कलियुगमें अनेकों दोषोंकी सम्भावनासे ही सप्ताहश्रवणका विधान किया गया है॥ ४९॥
मनसश्चाजयाद्रोगात्पुंसां चैवायुषः क्षयात्।
कलेर्दोषबहुत्वाच्च सप्ताहश्रवणं मतम्॥ ४९
मनके असंयम, रोगोंकी बहुलता और आयुकी अल्पताके कारण तथा कलियुगमें अनेकों दोषोंकी सम्भावनासे ही सप्ताहश्रवणका विधान किया गया है॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 51) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/49/