श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.50

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यत्फलं नास्ति तपसा न योगेन समाधिना।

अनायासेन तत्सर्वं सप्ताहश्रवणे लभेत्॥ ५०

yatphalaṃ nāsti tapasā na yogena samādhinā|

anāyāsena tatsarvaṃ saptāhaśravaṇe labhet|| 50

अर्थ

जो फल तप, योग और समाधिसे भी प्राप्त नहीं हो सकता, वह सर्वांगरूपमें सप्ताहश्रवणसे सहजमें ही मिल जाता है॥ ५०॥

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