॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.3.50
यत्फलं नास्ति तपसा न योगेन समाधिना।
अनायासेन तत्सर्वं सप्ताहश्रवणे लभेत्॥ ५०
yatphalaṃ nāsti tapasā na yogena samādhinā|
anāyāsena tatsarvaṃ saptāhaśravaṇe labhet|| 50
अर्थ
जो फल तप, योग और समाधिसे भी प्राप्त नहीं हो सकता, वह सर्वांगरूपमें सप्ताहश्रवणसे सहजमें ही मिल जाता है॥ ५०॥