॥ श्रीहरिः ॥
दुर्लभैव कथा लोके श्रीमद्भागवतोद्भवा।
कोटिजन्मसमुत्थेन पुण्येनैव तु लभ्यते॥ ४४
durlabhaiva kathā loke śrīmadbhāgavatodbhavā|
koṭijanmasamutthena puṇyenaiva tu labhyate|| 44
अर्थ
संसारमें श्रीमद्भागवतकी कथाका मिलना अवश्य ही कठिन है; जब करोड़ों जन्मोंका पुण्य होता है, तभी इसकी प्राप्ति होती है॥ ४४॥
दुर्लभैव कथा लोके श्रीमद्भागवतोद्भवा।
कोटिजन्मसमुत्थेन पुण्येनैव तु लभ्यते॥ ४४
संसारमें श्रीमद्भागवतकी कथाका मिलना अवश्य ही कठिन है; जब करोड़ों जन्मोंका पुण्य होता है, तभी इसकी प्राप्ति होती है॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 50) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/44/