श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.44

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

दुर्लभैव कथा लोके श्रीमद्भागवतोद्भवा।

कोटिजन्मसमुत्थेन पुण्येनैव तु लभ्यते॥ ४४

durlabhaiva kathā loke śrīmadbhāgavatodbhavā|

koṭijanmasamutthena puṇyenaiva tu labhyate|| 44

अर्थ

संसारमें श्रीमद्भागवतकी कथाका मिलना अवश्य ही कठिन है; जब करोड़ों जन्मोंका पुण्य होता है, तभी इसकी प्राप्ति होती है॥ ४४॥

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