श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.45

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तेन योगनिधे धीमन् श्रोतव्या सा प्रयत्नतः।

दिनानां नियमो नास्ति सर्वदा श्रवणं मतम्॥ ४५

tena yoganidhe dhīman śrotavyā sā prayatnataḥ|

dinānāṃ niyamo nāsti sarvadā śravaṇaṃ matam|| 45

अर्थ

नारदजी! आप बड़े ही बुद्धिमान् और योगनिधि हैं। आप प्रयत्नपूर्वक कथाका श्रवण कीजिये। इसे सुननेके लिये दिनोंका कोई नियम नहीं है, इसे तो सर्वदा ही सुनना अच्छा है॥ ४५॥

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