नारदजी! आप बड़े ही बुद्धिमान् और योगनिधि हैं। आप प्रयत्नपूर्वक कथाका श्रवण कीजिये। इसे सुननेके लिये दिनोंका कोई नियम नहीं है, इसे तो सर्वदा ही सुनना अच्छा है॥ ४५॥
तेन योगनिधे धीमन् श्रोतव्या सा प्रयत्नतः।
दिनानां नियमो नास्ति सर्वदा श्रवणं मतम्॥ ४५
नारदजी! आप बड़े ही बुद्धिमान् और योगनिधि हैं। आप प्रयत्नपूर्वक कथाका श्रवण कीजिये। इसे सुननेके लिये दिनोंका कोई नियम नहीं है, इसे तो सर्वदा ही सुनना अच्छा है॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 50) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/45/