उसके शब्द सुननेसे ही भक्ति, ज्ञान और वैराग्यको बड़ा बल मिलेगा। इससे ज्ञान-वैराग्यका कष्ट मिट जायगा और भक्तिको आनन्द मिलेगा॥ ६१॥✎ 1564
भक्तिज्ञानविरागाणां तद्घोषेण बलं महत्।
व्रजिष्यति द्वयोः कष्टं सुखं भक्तेर्भविष्यति॥ ६१
उसके शब्द सुननेसे ही भक्ति, ज्ञान और वैराग्यको बड़ा बल मिलेगा। इससे ज्ञान-वैराग्यका कष्ट मिट जायगा और भक्तिको आनन्द मिलेगा॥ ६१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.61 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 45) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/61/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)