श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.60

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सत्कर्मसूचको नूनं ज्ञानयज्ञः स्मृतो बुधैः।

श्रीमद्भागवतालापः स तु गीतः शुकादिभिः॥ ६०

satkarmasūcako nūnaṃ jñānayajñaḥ smṛto budhaiḥ|

śrīmadbhāgavatālāpaḥ sa tu gītaḥ śukādibhiḥ|| 60

अर्थ

पण्डितोंने ज्ञानयज्ञको ही सत्कर्म (मुक्तिदायक कर्म)का सूचक माना है। वह श्रीमद्भागवतका पारायण है, जिसका गान शुकादि महानुभावोंने किया है॥ ६०॥✎ 1564

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1564 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कर्म)-का → कर्म)का

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