श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.79

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

भक्तिरुवाच

सुरर्षे त्वं हि धन्योऽसि मद्भाग्येन समागतः।

साधूनां दर्शनं लोके सर्वसिद्धिकरं परम्॥ ७९

surarṣe tvaṃ hi dhanyo'si madbhāgyena samāgataḥ|

sādhūnāṃ darśanaṃ loke sarvasiddhikaraṃ param|| 79

अर्थ

भक्तिने कहा—देवर्षे! आप धन्य हैं! मेरा बड़ा सौभाग्य था जो आपका समागम हुआ। संसारमें साधुओंका दर्शन ही समस्त सिद्धियोंका परम कारण है॥ ७९॥

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