श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.78

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सूत उवाच

इति तद्वचनं श्रुत्वा विस्मयं परमं गता।

भक्तिरूचे वचो भूयः श्रूयतां तच्च शौनक॥ ७८

iti tadvacanaṃ śrutvā vismayaṃ paramaṃ gatā|

bhaktirūce vaco bhūyaḥ śrūyatāṃ tacca śaunaka|| 78

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकजी! इस प्रकार देवर्षि नारदके वचन सुनकर भक्तिको बड़ा आश्‍चर्य हुआ; फिर उसने जो कुछ कहा, उसे सुनिये॥ ७८॥

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