श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब अंशुमान्ने भगवान् कपिलमुनिके प्रभावका इस प्रकार गान किया, तब उन्होंने मन-ही-मन अंशुमान्पर बड़ा अनुग्रह किया और कहा॥ २८॥
इत्थं गीतानुभावस्तं भगवान् कपिलो मुनिः।
अंशुमन्तमुवाचेदमनुगृह्य धिया नृप॥ २८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब अंशुमान्ने भगवान् कपिलमुनिके प्रभावका इस प्रकार गान किया, तब उन्होंने मन-ही-मन अंशुमान्पर बड़ा अनुग्रह किया और कहा॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.8.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 44) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/8/28/