श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.29

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

अश्‍वोऽयं नीयतां वत्स पितामहपशुस्तव।

इमे च पितरो दग्धा गंगाम्भोऽर्हन्ति नेतरत्॥ २९

aśvo'yaṃ nīyatāṃ vatsa pitāmahapaśustava|

ime ca pitaro dagdhā gaṃgāmbho'rhanti netarat|| 29

अर्थ

श्रीभगवान्‌ने कहा—‘बेटा! यह घोड़ा तुम्हारे पितामहका यज्ञपशु है। इसे तुम ले जाओ। तुम्हारे जले हुए चाचाओंका उद्धार केवल गंगाजलसे होगा, और कोई उपाय नहीं है’॥ २९॥

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