परीक्षित्! इस प्रकार राजा हरिश्चन्द्र पुत्रके प्रेमसे हीला-हवाला करके समय टालते रहे। इसका कारण यह था कि पुत्र-स्नेहकी फाँसीने उनके हृदयको जकड़ लिया था। वे जो-जो समय बताते वरुणदेवता उसीकी बाट देखते॥ १५॥✎ 16372046
इति पुत्रानुरागेण स्नेहयन्त्रितचेतसा।
कालं वंचयता तं तमुक्तो देवस्तमैक्षत॥ १५
परीक्षित्! इस प्रकार राजा हरिश्चन्द्र पुत्रके प्रेमसे हीला-हवाला करके समय टालते रहे। इसका कारण यह था कि पुत्र-स्नेहकी फाँसीने उनके हृदयको जकड़ लिया था। वे जो-जो समय बताते वरुणदेवता उसीकी बाट देखते॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.7.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 39) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/7/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)