श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.43

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

मुनिः प्रवेशितः क्षत्त्रा कन्यान्तःपुरमृद्धिमत्।

वृतश्‍च राजकन्याभिरेकः पंचाशता वरः॥ ४३

muniḥ praveśitaḥ kṣattrā kanyāntaḥpuramṛddhimat|

vṛtaśca rājakanyābhirekaḥ paṃcāśatā varaḥ|| 43

अर्थ

फिर क्या था, अन्तःपुरके रक्षकने सौभरि मुनिको कन्याओंके सजे-सजाये महलमें पहुँचा दिया। फिर तो उन पचासों राजकन्याओंने एक सौभरिको ही अपना पति चुन लिया॥ ४३॥

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