श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.40

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

जातस्पृहो नृपं विप्रः कन्यामेकामयाचत।

सोऽप्याह गृह्यतां ब्रह्मन् कामं कन्या स्वयंवरे॥ ४०

jātaspṛho nṛpaṃ vipraḥ kanyāmekāmayācata|

so'pyāha gṛhyatāṃ brahman kāmaṃ kanyā svayaṃvare|| 40

अर्थ

उसके इस सुखको देखकर ब्राह्मण सौभरिके मनमें भी विवाह करनेकी इच्छा जग उठी और उन्होंने राजा मान्धाताके पास आकर उनकी पचास कन्याओंमेंसे एक कन्या माँगी। राजाने कहा—‘ब्रह्मन्! कन्या स्वयंवरमें आपको चुन ले तो आप उसे ले लीजिये’॥ ४०॥

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