श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.38

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

शशबिन्दोर्दुहितरि बिन्दुमत्याम२धान्‍नृपः।✎ 967

पुरुकुत्समम्बरीषं मुचुकुन्दं च योगिनम्।

तेषां स्वसारः पंचाशत् सौभरिं वव्रिरे पतिम्॥ ३८

śaśabindorduhitari bindumatyāmadhānnṛpaḥ|

purukutsamambarīṣaṃ mucukundaṃ ca yoginam|

teṣāṃ svasāraḥ paṃcāśat saubhariṃ vavrire patim|| 38

अर्थ

राजा मान्धाताकी पत्‍नी शशबिन्दुकी पुत्री बिन्दुमती थी। उसके गर्भसे उनके तीन पुत्र हुए—पुरुकुत्स, अम्बरीष (ये दूसरे अम्बरीष हैं) और योगी मुचुकुन्द। इनकी पचास बहनें थीं। उन पचासोंने अकेले सौभरि ऋषिको पतिके रूपमें वरण किया॥ ३८॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    मजीजनत्।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 35)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #967 शब्दोंके बीचका स्थान: बिन्दुमत्याम धान्‍नृप:। → बिन्दुमत्यामधान्‍नृपः।

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें