युवनाश्वके पुत्र मान्धाता (त्रसद्दस्यु) चक्रवर्ती राजा हुए। भगवान्के तेजसे तेजस्वी होकर उन्होंने अकेले ही सातों द्वीपवाली पृथ्वीका शासन किया॥ ३४॥✎ 1636
यौवनाश्वोऽथ मान्धाता चक्रवर्त्यवनीं प्रभुः।
सप्तद्वीपवतीमेकः शशासाच्युततेजसा॥ ३४
युवनाश्वके पुत्र मान्धाता (त्रसद्दस्यु) चक्रवर्ती राजा हुए। भगवान्के तेजसे तेजस्वी होकर उन्होंने अकेले ही सातों द्वीपवाली पृथ्वीका शासन किया॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 35) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/6/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)