श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.29

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

राज्ञा पीतं विदित्वाथ ईश्‍वरप्रहितेन ते।

ईश्‍वराय नमश्‍चक्रुरहो दैवबलं बलम्॥ २९

rājñā pītaṃ viditvātha īśvaraprahitena te|

īśvarāya namaścakruraho daivabalaṃ balam|| 29

अर्थ

अन्तमें जब उन्हें यह मालूम हुआ कि भगवान्‌की प्रेरणासे राजा युवनाश्‍वने ही उस जलको पी लिया है तो उन लोगोंने भगवान्‌के चरणोंमें नमस्कार किया और कहा—‘धन्य है! भगवान्‌का बल ही वास्तवमें बल है’॥ २९॥✎ 1636

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें