परीक्षित्! जब प्रातःकाल ऋषिलोग सोकर उठे और उन्होंने देखा कि कलशमें तो जल ही नहीं है, तब उन लोगोंने पूछा कि ‘यह किसका काम है? पुत्र उत्पन्न करनेवाला जल किसने पी लिया?’॥ २८॥✎ 1636
उत्थितास्ते निशाम्याथ व्युदकं कलशं प्रभो।
पप्रच्छुः कस्य कर्मेदं पीतं पुंसवनं जलम्॥ २८
परीक्षित्! जब प्रातःकाल ऋषिलोग सोकर उठे और उन्होंने देखा कि कलशमें तो जल ही नहीं है, तब उन लोगोंने पूछा कि ‘यह किसका काम है? पुत्र उत्पन्न करनेवाला जल किसने पी लिया?’॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 34) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/6/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)