श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तस्येषुपाताभिमुखं युगान्ताग्‍निमिवोल्बणम्।

विसृज्य दुद्रुवुर्दैत्या हन्यमानाः स्वमालयम्॥ १८

tasyeṣupātābhimukhaṃ yugāntāgnimivolbaṇam|

visṛjya dudruvurdaityā hanyamānāḥ svamālayam|| 18

अर्थ

उनके बाणोंकी वर्षा क्या थी, प्रलयकालकी धधकती हुई आग थी। जो भी उसके सामने आता, छिन्‍न-भिन्‍न हो जाता। दैत्योंका साहस जाता रहा। वे रणभूमि छोड़कर अपने-अपने घरोंमें घुस गये॥ १८॥

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