श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.17

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तैस्तस्य चाभूत् प्रधनं तुमुलं लोमहर्षणम्।

यमाय भल्लैरनयद् दैत्यान् येऽभिययुर्मृधे॥ १७

taistasya cābhūt pradhanaṃ tumulaṃ lomaharṣaṇam|

yamāya bhallairanayad daityān ye'bhiyayurmṛdhe|| 17

अर्थ

वीर पुरंजयका दैत्योंके साथ अत्यन्त रोमांचकारी घोर संग्राम हुआ। युद्धमें जो-जो दैत्य उनके सामने आये पुरंजयने बाणोंके द्वारा उन्हें यमराजके हवाले कर दिया॥ १७॥

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