वीर पुरंजयका दैत्योंके साथ अत्यन्त रोमांचकारी घोर संग्राम हुआ। युद्धमें जो-जो दैत्य उनके सामने आये पुरंजयने बाणोंके द्वारा उन्हें यमराजके हवाले कर दिया॥ १७॥
तैस्तस्य चाभूत् प्रधनं तुमुलं लोमहर्षणम्।
यमाय भल्लैरनयद् दैत्यान् येऽभिययुर्मृधे॥ १७
वीर पुरंजयका दैत्योंके साथ अत्यन्त रोमांचकारी घोर संग्राम हुआ। युद्धमें जो-जो दैत्य उनके सामने आये पुरंजयने बाणोंके द्वारा उन्हें यमराजके हवाले कर दिया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 33) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/6/17/