श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.46

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एवं ब्रुवाण उत्कृत्य जटां रोषविदीपितः।

तया३ स निर्ममे तस्मै कृत्यां कालानलोपमाम्॥ ४६

evaṃ bruvāṇa utkṛtya jaṭāṃ roṣavidīpitaḥ|

tayā sa nirmame tasmai kṛtyāṃ kālānalopamām|| 46

अर्थ

यों कहते-कहते वे क्रोधसे जल उठे। उन्होंने अपनी एक जटा उखाड़ी और उससे अम्बरीषको मार डालनेके लिये एक कृत्या उत्पन्‍न की। वह प्रलयकालकी आगके समान दहक रही थी॥ ४६॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    तपसा नि०।

    (मुद्रित पृष्ठ 24)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें