परम साध्वी सुन्दरी सुकन्याने जब देखा कि ये तीनों ही एक आकृतिके तथा सूर्यके समान तेजस्वी हैं, तब अपने पतिको न पहचानकर उसने अश्विनीकुमारोंकी शरण ली॥ १६॥
तान् निरीक्ष्य वरारोहा सरूपान् सूर्यवर्चसः।
अजानती पतिं साध्वी अश्विनौ शरणं ययौ॥ १६
परम साध्वी सुन्दरी सुकन्याने जब देखा कि ये तीनों ही एक आकृतिके तथा सूर्यके समान तेजस्वी हैं, तब अपने पतिको न पहचानकर उसने अश्विनीकुमारोंकी शरण ली॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 16) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/3/16/