उसके पातिव्रत्यसे अश्विनीकुमार बहुत सन्तुष्ट हुए। उन्होंने उसके पतिको बतला दिया और फिर च्यवन मुनिसे आज्ञा लेकर विमानके द्वारा वे स्वर्गको चले गये॥ १७॥
दर्शयित्वा पतिं तस्यै पातिव्रत्येन तोषितौ।
ऋषिमामन्त्र्य ययतुर्विमानेन त्रिविष्टपम्॥ १७
उसके पातिव्रत्यसे अश्विनीकुमार बहुत सन्तुष्ट हुए। उन्होंने उसके पतिको बतला दिया और फिर च्यवन मुनिसे आज्ञा लेकर विमानके द्वारा वे स्वर्गको चले गये॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 16) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/3/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)