श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.15

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

पुरुषास्त्रय उत्तस्थुरपीच्या१ वनिताप्रियाः।

पद्मस्रजः कुण्डलिनस्तुल्यरूपाः सुवाससः॥ १५

puruṣāstraya uttasthurapīcyā vanitāpriyāḥ|

padmasrajaḥ kuṇḍalinastulyarūpāḥ suvāsasaḥ|| 15

अर्थ

उसी समय कुण्डसे तीन पुरुष बाहर निकले। वे तीनों ही कमलोंकी माला, कुण्डल और सुन्दर वस्त्र पहने एक-से मालूम होते थे। वे बड़े ही सुन्दर एवं स्त्रियोंको प्रिय लगनेवाले थे॥ १५॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    रापीच्या।

    (मुद्रित पृष्ठ 16)

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