श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.61

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

कलौ जनिष्यमाणानां दुःखशोकतमोनुदम्।

अनुग्रहाय भक्तानां सुपुण्यं व्यतनोद् यशः॥ ६१

kalau janiṣyamāṇānāṃ duḥkhaśokatamonudam|

anugrahāya bhaktānāṃ supuṇyaṃ vyatanod yaśaḥ|| 61

अर्थ

पृथ्वीका भार तो उतरा ही, साथ ही कलियुगमें पैदा होनेवाले भक्तोंपर अनुग्रह करनेके लिये भगवान्‌ने ऐसे परम पवित्र यशका विस्तार किया, जिसका गान और श्रवण करनेसे ही उनके दुःख, शोक और अज्ञान सब-के-सब नष्ट हो जायँगे॥ ६१॥

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