श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.60

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

कर्माण्यपरिमेयाणि मनसापि सुरेश्‍वरैः।✎ 1893

सहसंकर्षणश्‍चक्रे भगवान् मधुसूदनः॥ ६०

karmāṇyaparimeyāṇi manasāpi sureśvaraiḥ|

sahasaṃkarṣaṇaścakre bhagavān madhusūdanaḥ|| 60

अर्थ

जब असुरोंने राजाओंका वेष धारण कर लिया और कई अक्षौहिणी सेना इकट्ठी करके वे सारी पृथ्वीको रौंदने लगे, तब पृथ्वीका भार उतारनेके लिये भगवान् मधुसूदन बलरामजीके साथ अवतीर्ण हुए। उन्होंने ऐसी-ऐसी लीलाएँ कीं, जिनके सम्बन्धमें बड़े-बड़े देवता मनसे अनुमान भी नहीं कर सकते—शरीरसे करनेकी बात तो अलग रही॥ ५९-६०॥✎ 1396

यह अर्थ श्लोक 59–60 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1396 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ह्रस → ह्रास
  • #1893 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुरैश्‍वरै: → सुरेश्‍वरैः

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