श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.27

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

तस्य पुत्रसहस्रेषु पंचैवोर्वरिता मृधे।

जयध्वजः शूरसेनो वृषभो मधुरूर्जितः॥ २७

tasya putrasahasreṣu paṃcaivorvaritā mṛdhe|

jayadhvajaḥ śūraseno vṛṣabho madhurūrjitaḥ|| 27

अर्थ

उसके हजारों पुत्रोंमेंसे केवल पाँच ही जीवित रहे। शेष सब परशुरामजीकी क्रोधाग्‍निमें भस्म हो गये। बचे हुए पुत्रोंके नाम थे—जयध्वज, शूरसेन, वृषभ, मधु और ऊर्जित॥ २७॥

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