जयध्वजके पुत्रका नाम था तालजंघ। तालजंघके सौ पुत्र हुए। वे ‘तालजंघ’ नामक क्षत्रिय कहलाये। महर्षि और्वकी शक्तिसे राजा सगरने उनका संहार कर डाला॥ २८॥
जयध्वजात् तालजंघस्तस्य पुत्रशतं त्वभूत्।
क्षत्रं यत् तालजंघाख्यमौर्वतेजोपसंहृतम् ॥ २८
जयध्वजके पुत्रका नाम था तालजंघ। तालजंघके सौ पुत्र हुए। वे ‘तालजंघ’ नामक क्षत्रिय कहलाये। महर्षि और्वकी शक्तिसे राजा सगरने उनका संहार कर डाला॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.23.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 111) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/23/28/