परीक्षित्! पिता दुष्यन्तकी मृत्यु हो जानेके बाद वह परम यशस्वी बालक चक्रवर्ती सम्राट् हुआ। उसका जन्म भगवान्के अंशसे हुआ था। आज भी पृथ्वीपर उसकी महिमाका गान किया जाता है॥ २३॥✎ 1647
पितर्युपरते सोऽपि चक्रवर्ती महायशाः।
महिमा गीयते तस्य हरेरंशभुवो भुवि॥ २३
परीक्षित्! पिता दुष्यन्तकी मृत्यु हो जानेके बाद वह परम यशस्वी बालक चक्रवर्ती सम्राट् हुआ। उसका जन्म भगवान्के अंशसे हुआ था। आज भी पृथ्वीपर उसकी महिमाका गान किया जाता है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 97) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/20/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)