उसके दाहिने हाथमें चक्रका चिह्न था और पैरोंमें कमल-कोषका। महाभिषेककी विधिसे राजाधिराजके पदपर उसका अभिषेक हुआ। भरत बड़ा शक्तिशाली राजा था॥ २४॥✎ 1647
चक्रं दक्षिणहस्तेऽस्य पद्मकोशोऽस्य पादयोः।
ईजे महाभिषेकेण सोऽभिषिक्तोऽधिराड् विभुः॥ २४
उसके दाहिने हाथमें चक्रका चिह्न था और पैरोंमें कमल-कोषका। महाभिषेककी विधिसे राजाधिराजके पदपर उसका अभिषेक हुआ। भरत बड़ा शक्तिशाली राजा था॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 97) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/20/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)