॥ श्रीहरिः ॥
रेतोधाः पुत्रो नयति नरदेव यमक्षयात्।
त्वं चास्य धाता गर्भस्य सत्यमाह शकुन्तला॥ २२
retodhāḥ putro nayati naradeva yamakṣayāt|
tvaṃ cāsya dhātā garbhasya satyamāha śakuntalā|| 22
अर्थ
राजन्! वंशकी वृद्धि करनेवाला पुत्र अपने पिताको नरकसे उबार लेता है। शकुन्तलाका कहना बिलकुल ठीक है। इस गर्भको धारण करानेवाले तुम्हीं हो’॥ २२॥
रेतोधाः पुत्रो नयति नरदेव यमक्षयात्।
त्वं चास्य धाता गर्भस्य सत्यमाह शकुन्तला॥ २२
राजन्! वंशकी वृद्धि करनेवाला पुत्र अपने पिताको नरकसे उबार लेता है। शकुन्तलाका कहना बिलकुल ठीक है। इस गर्भको धारण करानेवाले तुम्हीं हो’॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 97) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/20/22/