श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

माता भस्त्रा पितुः पुत्रो येन जातः स एव सः।

भरस्व पुत्रं दुष्यन्त मावमंस्थाः शकुन्तलाम्॥ २१

mātā bhastrā pituḥ putro yena jātaḥ sa eva saḥ|

bharasva putraṃ duṣyanta māvamaṃsthāḥ śakuntalām|| 21

अर्थ

‘पुत्र उत्पन्‍न करनेमें माता तो केवल धौंकनीके समान है। वास्तवमें पुत्र पिताका ही है। क्योंकि पिता ही पुत्रके रूपमें उत्पन्‍न होता है। इसलिये दुष्यन्त! तुम शकुन्तलाका तिरस्कार न करो, अपने पुत्रका भरण-पोषण करो॥ २१॥

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