श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.34

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

हेमचन्द्रः सुतस्तस्य धूम्राक्षस्तस्य चात्मजः।

तत्पुत्रात् संयमादासीत् कृशाश्‍वः सहदेवजः॥ ३४

hemacandraḥ sutastasya dhūmrākṣastasya cātmajaḥ|

tatputrāt saṃyamādāsīt kṛśāśvaḥ sahadevajaḥ|| 34

अर्थ

विशालसे हेमचन्द्र, हेमचन्द्रसे धूम्राक्ष, धूम्राक्षसे संयम और संयमसे दो पुत्र हुए—कृशाश्‍व और देवज॥ ३४॥

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