श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.35

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

कृशाश्‍वात् सोमदत्तोऽभूद् योऽश्‍वमेधैरिडस्पतिम्।

इष्ट्वा पुरुषमापाग्र्यां गतिं योगेश्‍वराश्रितः॥ ३५

kṛśāśvāt somadatto'bhūd yo'śvamedhairiḍaspatim|

iṣṭvā puruṣamāpāgryāṃ gatiṃ yogeśvarāśritaḥ|| 35

अर्थ

कृशाश्‍वके पुत्रका नाम था सोमदत्त। उसने अश्‍वमेध यज्ञोंके द्वारा यज्ञपति भगवान्‌की आराधना की और योगेश्‍वर संतोंका आश्रय लेकर उत्तम गति प्राप्त की॥ ३५॥

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