कृशाश्वके पुत्रका नाम था सोमदत्त। उसने अश्वमेध यज्ञोंके द्वारा यज्ञपति भगवान्की आराधना की और योगेश्वर संतोंका आश्रय लेकर उत्तम गति प्राप्त की॥ ३५॥
कृशाश्वात् सोमदत्तोऽभूद् योऽश्वमेधैरिडस्पतिम्।
इष्ट्वा पुरुषमापाग्र्यां गतिं योगेश्वराश्रितः॥ ३५
कृशाश्वके पुत्रका नाम था सोमदत्त। उसने अश्वमेध यज्ञोंके द्वारा यज्ञपति भगवान्की आराधना की और योगेश्वर संतोंका आश्रय लेकर उत्तम गति प्राप्त की॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 14) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/2/35/