श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ततोऽग्‍निवेश्यो भगवानग्‍निः स्वयमभूत् सुतः।

कानीन इति विख्यातो जातूकर्ण्यो महानृषिः॥ २१

tato'gniveśyo bhagavānagniḥ svayamabhūt sutaḥ|

kānīna iti vikhyāto jātūkarṇyo mahānṛṣiḥ|| 21

अर्थ

देवदत्तके अग्‍निवेश्य नामक पुत्र हुए, जो स्वयं अग्‍निदेव ही थे। आगे चलकर वे ही कानीन एवं महर्षि जातूकर्ण्यके नामसे विख्यात हुए॥ २१॥

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