श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.20

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

वीतिहोत्रस्त्विन्द्रसेनात् तस्य सत्यश्रवा अभूत्।

उरुश्रवाः सुतस्तस्य देवदत्तस्ततोऽभवत्॥ २०

vītihotrastvindrasenāt tasya satyaśravā abhūt|

uruśravāḥ sutastasya devadattastato'bhavat|| 20

अर्थ

इन्द्रसेनसे वीतिहोत्र, उससे सत्यश्रवा, सत्यश्रवासे उरुश्रवा और उससे देवदत्तकी उत्पत्ति हुई॥ २०॥

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