॥ श्रीहरिः ॥
ततो ब्रह्मकुलं जातमाग्निवेश्यायनं नृप।
नरिष्यन्तान्वयः प्रोक्तो दिष्टवंशमतः शृणु॥ २२
tato brahmakulaṃ jātamāgniveśyāyanaṃ nṛpa|
nariṣyantānvayaḥ prokto diṣṭavaṃśamataḥ śṛṇu|| 22
अर्थ
परीक्षित्! ब्राह्मणोंका ‘आग्निवेश्यायन’ गोत्र उन्हींसे चला है। इस प्रकार नरिष्यन्तके वंशका मैंने वर्णन किया, अब दिष्टका वंश सुनो॥ २२॥
ततो ब्रह्मकुलं जातमाग्निवेश्यायनं नृप।
नरिष्यन्तान्वयः प्रोक्तो दिष्टवंशमतः शृणु॥ २२
परीक्षित्! ब्राह्मणोंका ‘आग्निवेश्यायन’ गोत्र उन्हींसे चला है। इस प्रकार नरिष्यन्तके वंशका मैंने वर्णन किया, अब दिष्टका वंश सुनो॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 13) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/2/22/