tamāha rājañcharmiṣṭhāmādhāstalpe na karhicit|| 30
अर्थ
शुक्राचार्यजीने देवयानीका विवाह राजा ययातिके साथ कर दिया और शर्मिष्ठाको दासीके रूपमें देकर उनसे कह दिया—‘राजन्! इसको अपनी सेजपर कभी न आने देना’॥ ३०॥
नाहुषाय सुतां दत्त्वा सह शर्मिष्ठयोशना।
तमाह राजञ्छर्मिष्ठामाधास्तल्पे न कर्हिचित्॥ ३०
शुक्राचार्यजीने देवयानीका विवाह राजा ययातिके साथ कर दिया और शर्मिष्ठाको दासीके रूपमें देकर उनसे कह दिया—‘राजन्! इसको अपनी सेजपर कभी न आने देना’॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.18.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 89) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/18/30/