परीक्षित्! कुछ ही दिनों बाद देवयानी पुत्रवती हो गयी। उसको पुत्रवती देखकर एक दिन शर्मिष्ठाने भी अपने ऋतुकालमें देवयानीके पति ययातिसे एकान्तमें सहवासकी याचना की॥ ३१॥
विलोक्यौशनसीं राजञ्छर्मिष्ठा सप्रजां क्वचित्।
तमेव वव्रे रहसि सख्याः पतिमृतौ सती॥ ३१
परीक्षित्! कुछ ही दिनों बाद देवयानी पुत्रवती हो गयी। उसको पुत्रवती देखकर एक दिन शर्मिष्ठाने भी अपने ऋतुकालमें देवयानीके पति ययातिसे एकान्तमें सहवासकी याचना की॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.18.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 89) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/18/31/