श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.20

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

पितुः कायेन सन्धाय शिर आदाय बर्हिषि।

सर्वदेवमयं देवमात्मानमयजन्मखैः॥ २०

pituḥ kāyena sandhāya śira ādāya barhiṣi|

sarvadevamayaṃ devamātmānamayajanmakhaiḥ|| 20

अर्थ

परशुरामजीने अपने पिताजीका सिर लाकर उनके धड़से जोड़ दिया और यज्ञोंद्वारा सर्वदेवमय आत्मस्वरूप भगवान्‌का यजन किया॥ २०॥

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