adhvaryave pratīcīṃ vai udgātre uttarāṃ diśam|| 21
अर्थ
यज्ञोंमें उन्होंने पूर्व दिशा होताको, दक्षिण दिशा ब्रह्माको, पश्चिम दिशा अध्वर्युको और उत्तर दिशा सामगान करनेवाले उद्गाताको दे दी॥ २१॥
ददौ प्राचीं दिशं होत्रे ब्रह्मणे दक्षिणां दिशम्।
अध्वर्यवे प्रतीचीं वै उद्गात्रे उत्तरां दिशम्॥ २१
यज्ञोंमें उन्होंने पूर्व दिशा होताको, दक्षिण दिशा ब्रह्माको, पश्चिम दिशा अध्वर्युको और उत्तर दिशा सामगान करनेवाले उद्गाताको दे दी॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 82) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/16/21/