वे अपना भयंकर फरसा, तरकस, ढाल एवं धनुष लेकर बड़े वेगसे उसके पीछे दौड़े—जैसे कोई किसीसे न दबनेवाला सिंह हाथीपर टूट पड़े॥ २८॥
घोरमादाय परशुं सतूणं चर्म कार्मुकम्।
अन्वधावत दुर्धर्षो मृगेन्द्र इव यूथपम्॥ २८
वे अपना भयंकर फरसा, तरकस, ढाल एवं धनुष लेकर बड़े वेगसे उसके पीछे दौड़े—जैसे कोई किसीसे न दबनेवाला सिंह हाथीपर टूट पड़े॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 78) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/15/28/