॥ श्रीहरिः ॥
अथ राजनि निर्याते राम आश्रम आगतः।
श्रुत्वा तत्३ तस्य दौरात्म्यं चुक्रोधाहिरिवाहतः॥ २७
atha rājani niryāte rāma āśrama āgataḥ|
śrutvā tat tasya daurātmyaṃ cukrodhāhirivāhataḥ|| 27
अर्थ
जब वे सब चले गये, तब परशुरामजी आश्रमपर आये और उसकी दुष्टताका वृत्तान्त सुनकर चोट खाये हुए साँपकी तरह क्रोधसे तिलमिला उठे॥ २७॥
अथ राजनि निर्याते राम आश्रम आगतः।
श्रुत्वा तत् तस्य दौरात्म्यं चुक्रोधाहिरिवाहतः॥ २७
जब वे सब चले गये, तब परशुरामजी आश्रमपर आये और उसकी दुष्टताका वृत्तान्त सुनकर चोट खाये हुए साँपकी तरह क्रोधसे तिलमिला उठे॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 78) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/15/27/टिप्पणियाँ
- ३
स तस्य।
(मुद्रित पृष्ठ 78)