sa tāṃ vīkṣya kurukṣetre sarasvatyāṃ ca tatsakhīḥ|
paṃca prahṛṣṭavadanāḥ prāha sūktaṃ purūravāḥ|| 33
अर्थ
एक दिन कुरुक्षेत्रमें सरस्वती नदीके तटपर उन्होंने उर्वशी और उसकी पाँच प्रसन्नमुखी सखियोंको देखा और बड़ी मीठी वाणीसे कहा—॥ ३३॥✎ 2051
स तां वीक्ष्य कुरुक्षेत्रे सरस्वत्यां च तत्सखीः।
पंच प्रहृष्टवदनाः प्राह सूक्तं पुरूरवाः॥ ३३
एक दिन कुरुक्षेत्रमें सरस्वती नदीके तटपर उन्होंने उर्वशी और उसकी पाँच प्रसन्नमुखी सखियोंको देखा और बड़ी मीठी वाणीसे कहा—॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.14.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 73) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/14/33/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)